Thursday , August 17 2017
Google Doodle Antikythera

यह है दो हजार साल पूराना कम्प्यूटर, आज ही के दिन हुई थी खोज

कई बार दुनिया में ऐसी चीजें मिल जाती है जो आधुनिक वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित कर देती है। कुछ ऐसा ही हुआ वर्ष 1902 में जब खोजकर्ताओं ने दुनिया के सबसे पहले कम्प्यूटर की खोज कर डाली। जिसका नाम “एंटीकाइथेरा मैकेनिज्म” रखा गया। यह करीब दो हजार साल पूराना था औऱ एक जहाज के मलबे में से मिला था। इसकी संरचना इतनी जटिल थी कि खोज के सौ साल से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी यह आज भी वैज्ञानिकों को रिझाता है।

Antikythera_model_front_panel_Mogi_Vicentini_2007

समुद्र में से इसे निकालने के बाद जब डेटिंग पद्धति से इसके बनने का समय निकाला गया तो खोजकर्ताओं आश्चर्यचकित रह गए। एक तरह का यह एनालाॅग कम्प्यूटर करीब 60 बीसी में बना था। इसकी मदद से ग्रीक लोग सुर्य और चन्द्रमा समेत अन्य ग्रहों की गति की गणऩा करते थे। अगर आपने पूरानी गियर वाली घड़ियां देखी होगी तो आपको पता ही होगा कि उन घड़ियों के छोटे-छोटे कलपूर्जे बनाने में वाॅचमेकर को कितनी मेहनत लगती है। लेकिन यह तो वर्तमान की बात है। जानकारों का कहना है कि एंटीकाइथेरा कम्प्यूटर में 30 गियर से भी ज्यादा थे। इंसान 14वीं शताब्दी में ही इस तरह का यंत्र बना पाया था। फिर सवाल यह उठता है कि करीब दो हजार साल पहले के इंसानों ने यह यंत्र कैसे बनाया?

ऐसे हुई थी रोचक खोज

ग्रीक आइसलैण्ड एंटीकाईथेरा के तट पर पूराने जहाज के टुकड़ों में से एंटीकाईथेरा मैकेनिज्म मिला था। हुआ यूं कि वर्ष 1900 में कुछ गोताखोर इस जहाज में से पूरानी कलाकृतियां, कांसे और संगमरमर की बनी मूर्तियों और बर्तन आदि को निकाल रहे थे। इसी दौरान इन मूर्तियों आदि के साथ एंटीकाइथेरा भी जहाज के मलबे से निकला। लेकिन गोताखोर मूर्ति और बर्तन को निकालने में इतने व्यस्त थे कि उन्होंने इस नायाब चीज की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। बाद में जहाज के मलबे से निकले सभी सामान को एथेंस के नेशनल म्यूजियम आॅफ आर्कियोलाॅजी में रख दिया गया।

इसके करीब दो साल बाद म्यूजियम के पुरात्तवेताओं की नजर एक टूकड़े पर पड़ी जिसमें गियर व्हील यानी पूराने घड़ियों में आने वाले गोल चक्के बने हुए थे। समुद्र के पानी में हजारों साल से पड़े रहने के कारण इसमें पूरी तरह जंग लग गया था। उस समय इसे एक खगोलीय घड़ी समझा गया और इसकी तकनीक देख लोग चौंक गए। लेकिन उस समय तकनीक ना होने के चलते इसका अच्छे तरह से परीक्षण नहीं किया जा सका। करीब पचास साल बाद वर्ष 1951 में येल यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ्रेसर की इसमें रूचि जागी। फिर वर्ष 1971 में इसके 82 टूकड़ों की एक्स-रे और गामा ईमेज बनाई गई। तब जाकर इसके अंदर की जटिलता का पता चल सका।
antikythera
कुछ लोग इसे एलियन से भी जोड़कर देखते हैं। लोग कहते हैं कि कुछ परग्रहियों ने इसे धरती पर छोड़ दिया था क्योंकि उस समय का इंसान इस तरह की चीज नहीं बना सकता है। इस मामले में ताजा शोध यह भी बताते हैं कि इस यंत्र का इस्तेमाल भविष्य देखने के लिए भी किया जाता था। शोधकर्ताओं ने इस कम्प्यूटर की मुख्य प्लेट पर से ग्रीक भाषा में लिखे करीब 3500 शब्दों के निर्देश भी खोज निकाला हैं। इनसे यह भी पता चला है कि इस तरह की दो मशीनें बनाई गई थी। हालांकि अभी तक एक ही मिल सकी है।

गूगल ने बनाया एंटीकाइथेरा डूडल

आप यह जानते ही होगें कि सर्च इंजन कंपनी गूगल विशेष मौकों पर अपनी सर्च वेबसाइट के लोगों को क्रिएटिव डूडल में बदलती है। आज भी आप गूगल डाॅट काॅम पर जाएंगे तो पाएंगे कि गूगल ने यंत्रनुमा एक अजीब सा डूडल बनाया है। गूगल ने एंटीकाइथेरा की आज के ही दिन 17 मई को हुई खोज के चलते यह डूडल बनाया है। इसकी खोज के बाद से ही कई शोधकर्ता आदि इसका काम करने वाला माॅडल भी तैयार कर चुके हैं। हालांकि वे पूरी तरह से कामयाब नहीं हो सके, लेकिन फिर भी ये नए माॅडल हमें इस पूराने कम्प्यूटर की जटिलता के समझने में मदद करते हैं।

आप टेकसंदेश के Guides/ How To सेक्शन में जाकर भी अन्य आर्टिकल पढ़ सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्वीटर या यूट्यूब पर बने रहें।

Check Also

बहुत काम के हैं ये 15 गूगल क्रोम एक्सटेंशन! क्या आपने डाउनलोड किए?

गूगल क्रोम एक्सटेंशन बहुत छोटी साइज के प्रोग्राम होते हैं जो आपके ब्राउजर में नए …