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फेसबुक से डाटा शेयर करने पर इटली ने लगाया व्हाट्सऐप पर 35 करोड़ रूपए का फाइन, भारत में आज होगी सुनवाई

एक ओऱ भारत में व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पाॅलिसी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है तो वहीं दूसरी ओर लंबे समय से इटली में इसी मामले में चल रही बहस को विराम लग गया। इटली एंडीट्रस्ट आॅर्थोरिटी ने यूजर का का डाटा अपनी मालिकाना कंपनी फेसबुक को देने के मामले में 3 मिलियन डाॅलर करीब 35 करोड़ रुपए का जुर्माना भरने का फरमान सुनाया है। मामले में सुनवाई शुक्रवार को की गई।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही व्हाट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी पाॅलिसी में बदलाव किया था कि वह अपनी सर्विस को सुधारने के लिए यूजर से मिलने वाले डाटा को फेसबुक के साथ शेयर करने जा रहा है। जिसके बाद दुनियाभर में व्हाट्सऐप के कई यूजर ने इस कदम का विरोध भी किया था। भारत समेत इटली, जर्मनी आदि देशों में इसके विरोध में मामले भी दर्ज करवाए गए थे।

इटालियन कम्पीटिशन वाॅचडाॅग ने इसी मामले में व्हाट्सऐप को साफतौर यूजर से मिले डाटा को डिलीट करने के लिए कह दिया है। कुछ ऐसा ही फैसला जर्मनी ने भी व्हाट्सऐप के इसी मामले में सुनाया था। लेकिन दूसरी ओर व्हाट्सऐप और उसकी मालिकाना कंपनी फेसबुक का कहना है कि वह इस बारे में अधिकारियों से बात करेगा। कंपनी का कहना है कि वह इस फैसले की अभी समीक्षा कर रहा है और जल्द ही अधिकारियों को जवाब देगा।

आपको बता दे कि फेसबुक ने व्हाट्सऐप को वर्ष 2014 में 19 बिलियन डाॅलर में खरीदा था। जिसके बाद से ही फेसबुक व्हाट्सऐप में कई बदलाव कर रहा है। फेसबुक ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पाॅलिसी जो यूजर के साथ एक एग्रीमेंट होता है। उसे बदलने के साथ ही नए स्टेटस फीचर जैसे कई बदलाव किए है। जिसके चलते कंपनी को आलोचनाएं झेलनी पड़ी है। हालांकि इटली व्हाट्सऐप 5 मिलियन डाॅलर तक राशि का जुर्माना लगा सकता था। लेकिन फिलहाल 3 मिलियन डाॅलर ही व्हाट्सऐप को चुकाने होगें।

भारत में आज होगी सुनवाई

कुछ इसी तरह का मामला भारत में सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है जिसमें 5 जजों की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पाॅलिसी में बदलाव के चलते एक याचिका दायर की गई थी। जिसके बाद पहले वाली सुनवाई में व्हाट्सऐप के वकील ने कोर्ट में कहा था कि जिन यूजर को नई पाॅलिसी से दिक्कत है वह व्हाट्सऐप चलाना बंद कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने मामले में साफ कर दिया है कि वह जल्द ही एक नियामक बाॅडी बनाने जा रहे हैं जो इस तरह के मामलों में निर्णय ले सकेगी।

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