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Paytm wallet
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क्वाॅलकाॅम का दावा- पेटीएम & मोबिक्विक जैसे वाॅलेट पर हो सकता है सायबर हमला

नोटबंदी के बाद से देश में पिछले महीने मोबाइल वालेट जैसे पेटीएम और मोबिक्विक जैसी एप्लीकेशंस को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। एक और यह मोबाइल वॉलेट सर्विस कैश के कमी के चलते लोगों के बहुत ही काम आ रही है। वहीं दूसरी ओर लोगों को इनकी सुरक्षा के लिए भी सतर्क रहना चाहिए। पिछले दिनों काफी सोच-विचार के बाद पेटीएम ने अपने मोबाइल वॉलेट की स्मार्टफोन ऐप में सुरक्षा को लेकर नए फीचर्स डाले हैं। लेकिन हैंकिग की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह मोबाइल वालेट पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, जैसी कि सभी उम्मीद लगा कर बैठे हैं।

हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स की स्मार्टफोन की चिपमेकर कंपनी क्वॉलकॉम के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव ने इन मोबाइल वॉलेट जैसे पेटीएम, मोबिक्विक और अन्य की सुरक्षा को लेकर अंदेशा जताया है। उनके अनुसार यह सर्विसेस कभी भी गंभीर सॉफ्टवेयर अटैक का सामना कर सकती है। इसका कारण उन्होंने यह बताया है कि यह सर्विसेस हार्डवेयर आधारित सुरक्षा परत का इस्तेमाल नहीं करती है जो स्मार्टफोन की चिप बनाने वाली कंपनी की ओर से दी जाती है। कहा जा रहा है कि इंडिया में अभी वर्तमान में पेमेंट के तौर पर इस्तेमाल में आ रहे पेटीएम जैसे उपाय विदेशों में काम आ रहे ऐप्पल पे या सैमसंग पे जैसे अन्य समाधानों की तरह कारगर नहीं है। क्वाॅलकॉम के प्रोग्राम मैनेजमेंट के सीनियर डायरेक्टर ने कहा है कि हार्डवेयर आधारित सुरक्षा परत किसी भी स्मार्टफोन में मालवेयर अटैक से बचाती है और यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी तरह से मोबाइल पेमेंट को खतरा न हो।

खास तौर पर नोट बंदी के बाद 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा के बाद से हाल ही में मोबाइल वालेट का इस्तेमाल देश में बहुत ही तेजी से बढ़ा है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है कि इन्हें सुरक्षित किया जाएं। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विदेशी वॉलेट कंपनियां जैसे अली-पे, वीचैट-पे और पे-पल आदि पहले से ही हार्डवेयर आधारित सुरक्षा उपायों की ओर रुख कर चुकी है। इसलिए हम कह सकते हैं कि विदेशों में इस्तेमाल होने ये वाली ये सर्विस अभी इंडिया में इस्तेमाल होने वाली सर्विस से ज्यादा सुरक्षित है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं हुआ कि भारतीय मोबाइल वॉलेट बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। यह केवल एंड्रॉयड आधारित सुरक्षा परत का इस्तेमाल करते हैं जिसे आसानी से बाईपास कर आपका डाटा भी चुराया जा सकता है और किसी भी तरह के मालवेयर से स्मार्टफोन को इंफेक्ट किया जा सकता है।

इसके बारे में क्वालकॉम भी अपने मोबाइल चिपसेट में आने वाले सालों में कुछ नए तरह के फीचर जोड़ने जा रहा है। इन फीचर्स में कुछ अन्य यूजर वेरिफिकेशन जैसे डिवाइस ID, फोन निर्माता का सिग्नेचर और कुछ अन्य इन चीजों को डालेगा। जिन्हें कॉपी करना एक तौर पर नामुमकिन ही होगा। आप हमें कमेंट कर बताएं कि नोटबंदी के दौर में आप किस तरह अपना काम चला रहे हैं और किस कंपनी के मोबाइल वाॅलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मामले में ज्यादा जानकारी के लिए फोन राडार के साथ बने रहें।

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