Tuesday , October 24 2017
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स्पेस एक्स लाएगा 17 से 23Gbps स्पीड वाला इंटरनेट, अंतरिक्ष में लाॅन्च करेगा 4,425 सैटेलाइट

अमेरिकी एयरोस्पेस निर्माता और अंतरिक्ष परिवहन सेवा कंपनी ‘स्पेस एक्स’ का पहले से ही अंतरिक्ष परिवहन के क्षेत्र में बड़ा नाम है। कंपनी का मुख्यालय कैलिफोर्निया में है और इसने मंगल ग्रह पर यात्रा करवाने का प्लान अभी हाल ही में प्रस्तुत भी किया था। अब एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी एक ओर नया प्लान लेकर आई है जिसके अनुसार यह पूरी दूनिया के लोगों को तेज गति का इंटरनेट देना चाहती है।

इसी सप्ताह कंपनी ने अमेरिकी संघीय संचार आयोग को उपग्रह अंतरिक्ष स्टेशन प्राधिकरण के लिए एक एप्लीकेशन लिखी है। जिससे लोगों की धड़कने बढ़ गई है कि कंपनी आगे क्या करने जा रही है। एप्लीकेशन के अनुसार कंपनी ने 4,425 सैटेलाइट नेटवर्क का पुख्ता खाका प्रस्तुत किया है। जी हां, आपने सही पढ़ा। कंपनी कुल 4,425 सैटेलाइटों को पृथ्वी की कक्षा में भेजना चाहती है। इनकी ऊंचाई करीब 715 मील से 823 मील मतलब करीब 1150-1325 किमी तक हो सकती है।

यह भी ध्यान रखे कि यह ऊंचाई इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की ऊंचाई से भी ज्यादा है, लेकिन भू-स्थिर उपग्रहों से कम है। इस प्लान से विलंब कम हो जाएगा जो कि पहले से मौजूद सैटेलाइट इंटरनेट सिस्टम का मुख्य कारण है। सरल भाषा में बात करें तो जितनी ज्यादा दूरी होगी, डाटा पैकेट को उतना ही ज्यादा पृथ्वी और सैटेलाइट के बीच दूरी तय करनी पड़ेगी। जिससे इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे यूजर को यह देरी महसूस होगी। गूगल भी इसी तरह का एक प्रोजेक्ट ला चुका है जिसका नाम प्रोजेक्ट लून है। इसका मकसद दूर-सुदूर ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाना है।

प्रोजेक्ट लून समताप मंडल में करीब 18 किमी(11 मील) की उच्च उंचाई पर मौजूद गुब्बारों का इस्तेमाल करता है। इससे यह एक एरियल वायरलैस नेटवर्क बनाता है जिसकी स्पीड 4G-LTE की स्पीड के बराबर होती है। इस पर स्पेस एक्स का कहना है कि इस मामले में विलंब 25-35ms के बीच होगा जो कि वायर इंटरनेट सर्विस में भी होता है। अगर आपको इन आंकड़ों का पता नहीं चल रहा तो हम आपको बताना चाहेगें कि वर्तमान में संचालित सैटेलाइट ISP में विलंब 600ms या ज्यादा होता है। इसलिए यह कहना ठीक होगा कि स्पेस एक्स इस प्लान में कामयाब हो जाता है तो यह अद्वितीय होगा। इतना ही नहीं स्पेस एक्स के मुताबिक उसकी सैटेलाइट की बैंडविथ भी शानदार होगी। वर्तमान सैटेलाइट में यह भी एक चिंता का विषय है।

इस एप्लीकेशन में यह बताया गया है कि प्रत्येक सैटेलाइट की डाउनलिंक कैपिसिटी 17 से 23Gbps होगी। शुरूआत में करीब 800 सैटेलाइट अंतरिक्ष कक्षा में भेजने के साथ ही यह सिस्टम पूरे अमेरिका और इंटरनेशनल ब्राडबैंज कनेक्टिवटी को कवर कर लेगा। जिसके बाद बाकि की सैटेलाइट भेजकर इसे पूरी तरह और पूरी क्षमता के साथ चलाया जा सकता है। एक बार यह चालू हो जाने के बाद यह सिस्टम वैश्विक कवरेज देगा। यहां यह भी ध्यान रखें कि यह प्रोजेक्ट पूरा होने में बहुत समय भी लग सकता है। लेकिन एक बार इसके लागू होने के बाद यह इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में जरुर क्रांति ला सकता है। ज्यादा जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहिए।

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