Thursday , June 29 2017
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विश्व की आधी से ज्यादा आबादी अभी भी इंटरनेट से अछूती: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की इकाई इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन (ITU) ने एक वार्षिक ग्लोबल रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी के पास अभी भी इंटरनेट कनेक्शन नहीं है। लेकिन रिपोर्ट यह भी कहती है कि यह स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है और रोजाना कई लोग आॅनलाइन आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में विश्व की 84 प्रतिशत आबादी नेटवर्क की पहुंच में है लेकिन फिर भी 47.1 प्रतिशत आबादी ही आॅनलाइन रहती है। जो कि वर्ष 2015 के 43 प्रतिशत के आंकड़े से बेहतर है। इसके मुताबिक मोबाइल फोन नेटवर्क ने इस मामले में बड़ा किरदार निभाया है। फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को आॅनलाइन लाने के लिए प्रयासरत है।

रिपोर्ट में पूरे विश्व के लोगों में मोबाइल का चलन आने पर भी प्रकाश डाला गया है। इसे मोबाइल सेल्युलर सब्क्रिप्शन के आधार पर मापा गया है। जिसके अनुसार इस साल के अंत तक दुनिया की आबादी के बराबर मोबाइल सेल्युलर सब्क्रिप्शन हो जाएंगे। वहीं मोबाइल टावरों के सिग्नल विश्व की करीब 95 प्रतिशत आबादी को कवर कर रहे होगें। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई लोगों के पास एक से ज्यादा सब्क्रिप्शन या डिवाइस भी हैं।

लगातार दूसरी बार साउथ कोरिया पहले स्थान पर
पिछले साल के मुकाबले इंटरनेट के मामले में हुई यह प्रगति ज्यादातर विकासशील देशों में हुई है। लेकिन इन्हीं देशों के कई इलाकों में अभी भी लोग मोबाइल फोन तक का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में साउथ कोरिया पिछले साल की तरह ही इस बार भी पहले नंबर पर रहा है। इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में प्रथम दस देशों में से सात यूरोपीय देश तो वहीं दो एशिया-प्रशान्त के देश हैं। वहीं दूसरी ओर अफ्रीकी देशों जैसे नाइजर, चाड, साउथ सुडान आदि देश कनेक्टिवटी के मामले में बहुत पिछड़े हुए है। इन देशों में अभी भी लोग डिवाइस नहीं खरीद पा रहे हैं। इंटरनेट ना चलाने वाले लोगों में सबसे ज्यादा महिलाएं, बुढे, कम पढ़े-लिखे, गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग है।

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इंटरनेट से बदला लोगों का जीवन
यह रिपोर्ट पूरे विश्व के 175 देशों पर किए गए अध्ययन के बाद निकाली गई है। ITU हर साल इस बारे में यह रिपोर्ट प्रकाशित करता है। इसके अनुसार देशव्यापी, खुला, फास्ट और विभिन्न तरह के कंटेंट वाले इंटरनेट ने लोगों के जीवन को बदल कर रख दिया है। लोगों के रहन-सहन, संचार और बिजनेस करने के तरीके में काफी बदलाव आय़ा है। इससे ना केवल किसी एक को बल्कि सरकार, संस्थाओं और प्राइवेट सेक्टर को भी फायदा हुआ है। हालांकि कई लोगों ने इसका स्वाद अभी भी नहीं चखा है।

मोबाइल प्लान 20% तक सस्ते हुए
रिपोर्ट के अनुसार सबसे कम विकसित देशों में पिछले कुछ सालों में मुकाबले इस साल 20 प्रतिशत तक मोबाइल-सेल्युलर कीमतों में गिराव देखने को मिला। कीमतों में गिराव को लोगों तक तकनीक की पहुंच से जोड़ा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक फिक्स्ड ब्राॅडबैंड भी लोगों की पहुंच में आय़ा है और इसका खर्चा वर्ष 2000 में $80 से अंतिम वर्ष $25 पर आ गया है। लेकिन इसकी लोकप्रियता मोबाइल ब्राॅडबैंड को पार नहीं कर पाई है।

रिपोर्ट यह दर्शाती है कि किस तरह पिछले कुछ सालों में विश्व की आधी आबादी तक इंटरनेट पहुंचा है और साथ ही बची हुई आबादी तक इंटरनेट से अछूती क्यों है। रिपोर्ट कहती है कि लोगों तक इंटरनेट पहुंचाने वाली इंडस्ट्री के पास अभी भी इस मामले में आगे बढ़ने के बहुत मौके है। जिससे कि विश्व के लोग जल्दी और बेहतर रूप से एक-दूसरे से जुड़ पाएं। इस रिपोर्ट को विभिन्न सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, बैंक, प्राइवेट सेक्टर विश्लेषक आदि से मिली जानकारी के बाद बनाया गया है।

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