Tuesday , October 24 2017
ISRO

विश्व रिकाॅर्ड- इसरो ने लगाया अंतरिक्ष में सैटेलाइट का शतक

जिसके बारे में कई दिनों से बात हो रही थी। उसे आज इंडियन स्पेस रिसर्च आॅर्गेनाइजेशऩ (ISRO) ने आखिरकार अंजाम दे ही दिया। इसरो ने अपने PSLV राॅकेट से विभिन्न देशों की 104 सैटेलाइटों को आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष में उनकी कक्षा में लाॅन्च कर दिया। इसके साथ ही अंतरिक्ष में सैटेलाइट लाॅन्च करने के मामले में इसरो के नाम एक विश्व रिकाॅर्ड कायम हो गया है। यह PSLV की 39वीं उड़ान थी।

इससे पहले 37 सैटेलाइट एक साथ लाॅन्च करने का रिकाॅर्ड रुस की अंतरिक्ष एजेंसी के नाम था। वहीं अमेरिकी अतंरिक्ष एजेंसी नासा अभी तक एक बार में 29 सैटेलाइट लाॅन्च कर पाई है। लेकिन अब इसरो ने एक साथ 100 सैटेलाइट लाॅन्च कर इन्हें काफी पीछे छोड़ दिया है। इन 100 सैटेलाइट में से 96 अमेरिका की थी। वहीं अन्य इजराइल, कजाकिस्तान, नीदरलैण्ड्स, स्विटजरलैण्ड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की थी।

सैटेलाइन डायरेक्टर सदानन्द राव के मुताबिक कैरोसेट-2 सैलेलाइट अपनी कक्षा में स्थापित हो गई है और इसे अब बैंगलुरू कमांड सेंटर संचालित कर रहा है। पिछले साल भी इसरो ने रिकाॅर्ड 20 सैटेलाइट को एक ही बार में लाॅन्च किया था।

इस मौके पर देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी भी इसरो को बधाई देते हुए कहा कि “इस उपलब्धि पर पूरा देश गर्व कर रहा है। यह उपलब्धि इंडिया की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रतीक है।” वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीटर पर इसरो को कैरोसेट और अन्बय 103 सैटेलाइट के लाॅन्च के लिए बधाई दी।

इसरो के चैयरमैन किरन कुमार ने रिकाॅर्ड लाॅन्च पर बताया कि,”सभी 104 सैटेलाइट अपनी कक्षाओं में पहुंच गई है। मैं इसके लिए तहेदिल से पूरी इसरो टीम को बधाई देता हूं। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम है। हम किसी तरह के रिकाॅर्ड का मकसद नहीं है। हम बस प्रत्येक लाॅन्च के साथ खुद की क्षमता को बढ़ा रहे हैं। हमारा मकसद लाॅन्च की क्षमता को बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाना है।”

इसरो पिछले कुछ वर्षों में चंद्रयान, मंगलयान जैसी कई उपलब्धियां अपने नाम कर चुका है। वर्ष 2008 में इसरो मानव रहित अंतरिक्ष यान को चंद्रमा पर भेज चुका है। जिससे ऐसा करने वाला भारत विश्व का सातवां देश बना था। वहीं वर्ष 2013 में इसरो ने मंगल ग्रह पर पहले प्रयास में ही मंगलयान भेज दुनिया को चौंका दिया था। अपने पहले प्रयास में ऐसा करने वाला भारत पहला देश बना था। वहीं अमेरीकी, यूरोपीयन औऱ रुस आदि देशों की स्पेस एजेंसियों को ऐसा करने में कई प्रयास करने पड़े थे।

आप टेकसंदेश के Guides/ How To सेक्शन में जाकर भी अन्य आर्टिकल पढ़ सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्वीटर या यूट्यूब पर बने रहें।

Check Also

ISRO

इसरो मार्च में लाॅन्च कर सकता है सार्क सैटेलाइट, वर्ष 2018 में चंद्रायान-2

इंडियन स्पेस रिसर्च आॅर्गेनाइजेशन (ISRO) इस वर्ष मार्च औऱ अप्रैल माह में दक्षिण भारतीय सहयोग …